Azam Khan साहब सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं बल्कि इज़्ज़त, आत्मसम्मान, ओर इंसानियत की लड़ाई भी लड़ रहे हैं ।

रामपुर जेल की ठंडी दीवारों के बीच, कल का दिन आज़म ख़ान साहब के लिए कड़वे तज़ुर्बे और मीठी ख़बर दोनों लेकर आया।अदालत ने अमर सिंह के परिवार पर की गई टिप्पणी वाले मामले में सबूतों के अभाव में उन्हें बाइज़्ज़त बरी कर दिया, लेकिन इस राहत की घड़ी में भी वे एक बीमार, बुज़ुर्ग और अपने को राजनीतिक क़ैदी मानने वाले नेता की तरह अपमान के एहसास से गुज़रते रहे।

 

 

 

जेल के गेट पर जब पेशी के लिए कैदियों को ले जाने वाली बड़ी गाड़ी खड़ी दिखी, तो आज़म साहब ने उसे सिर्फ़ एक साधारण कैदी वाहन नहीं, बल्कि अपने आत्मसम्मान पर चोट के रूप में देखा। उन्होंने साफ़ कहा कि वे कोई आम मुलज़िम नहीं बरसों से सूबे की सियासत का बड़ा चेहरा रहे हैं, बीमार भी हैं इसलिए उन्हें बोलेरो जैसी छोटी आरामदेह गाड़ी चाहिए, उसी में अदालत जाएंगे।

 

छोटी गाड़ी न आने पर वे जेल के गेट से लौट गए और अंततः वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए अदालत के सामने पेश हुए, वहीं से अपनी तकलीफ़ें और जेल में मिल रही खराब सुविधाओं का दर्द भी जज के सामने बयां किया। अदालत ने जब बरी होने का फ़ैसला सुनाया, तो आज़म ख़ान साहब ने शुक्रिया अदा करते हुए यह भी जता दिया कि सज़ा भुगतता हुआ यह बुज़ुर्ग नेता सिर्फ़ क़ानूनी लड़ाई ही नहीं, इज़्ज़त और इंसानियत की लड़ाई भी लड़ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *