google-site-verification=XiEBeofVSvCifgkcZ4LITy--_oeJaBQZus5PBss3HhI google-site-verification=XiEBeofVSvCifgkcZ4LITy--_oeJaBQZus5PBss3HhI
Breaking
Mon. Jun 22nd, 2026

Azam Khan शायद इस वक़्त वो कुरआन की तिलावत में मशग़ूल होंगे लबों पर अलहम्दुलिल्लाह होगा

azam khan abdullah azam khan
azam khan abdullah azam khan

Azam Khan शायद इस वक़्त वो कुरआन की तिलावत में मशग़ूल होंगे लबों पर अलहम्दुलिल्लाह होगा

ऐ अल्लाह मैं तेरी हर रज़ा पर राज़ी हूँ
तू हमें जिस हाल में रख हम उसी में तेरी रहमत तलाश करते रहेंगे।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
azam khan abdullah azam khan
azam khan abdullah azam khan

हम तो अपने घरों की नरम रज़ाइयों में, सुकून की नींद सो रहे हैं

कमरों में गर्माहट है लेकिन उधर
अज़म ख़ान साहब और अब्दुल्लाह अज़म ख़ान
शायद ठंडी ज़मीन पर एक पतला सा कम्बल ओढ़े हुए होंगे।
हमारे तकियों में आराम है,
उनके सिरेहाने पर सख़्ती और इम्तिहान।
हमारी रातें चैन से कट रही हैं
उनकी रातें सब्र और इबादत में ढली होंगी।

शायद इस वक़्त
वो कुरआन की तिलावत में मशग़ूल होंगे
लबों पर अलहम्दुलिल्लाह होगा
दिलों में रज़ा-ए-इलाही।
हमारे पास आज़ादी है उनके पास इम्तिहान
लेकिन अल्लाह के करीब वही हैं
जिनके दिलों में सब्र है और ज़ुबान पर शुक्र है

किस्मत का खेल भी अजीब है
कुछ लोग जेल की ठंडी हवा में भी इज़्ज़त के साथ अपने रब को याद करते हुए सोते हैं
और कुछ लोग महलों में रहकर भी बेचैन।

Related Post