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Mon. Jun 22nd, 2026

Azam Khan – मैं मासूम बेटियों को पढ़ाता हूं गरीबों के लिए स्कूल बनाता हूं ₹20 फीस लेता हूं।

jauhar university rampur
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Azam Khan – मैं मासूम बेटियों को पढ़ाता हूं गरीबों के लिए स्कूल बनाता हूं ₹20 फीस लेता हूं।

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मेरा मुकाम महल ना हो, एक रिक्शा चलाने वाले के टूटे हुए दिल के अंदर हो। मेरी याद अखिलेश यादव जी के दिल के अंदर हो।
हमें ज़हर खाने के लिए मजबूर मत करो।

मुसलमानों से वोट का अधिकार छीन लो, उस दिन तुम्हारे हाथ में सत्ता नहीं रहेगी। माननीय मोहम्मद आज़म खान साहब के अल्फ़ाज़ ।

आज़म साहब ने कहा था कि बेगुनाह को बेगुनाह साबित होना दुर्लभ है पुलिस ने सच छिपाने की पूरी कोशिश की उन्होंने न्याय की जीत बताया था और कहा था तुझको मालूम है दुनिया तुझे क्या कहती है आओ इंतकाम लो एक-एक आंसू का बदला लो सरकार ने लोगों को धोखा दिया है

आज़म खान साहब का रामपुर में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान एक ऐसी मिसाल है,

जो दिल को छू जाती है। उन्होंने गरीब और वंचित बच्चों के चेहरों पर रोशनी बिखेरने का संकल्प लिया, जो आज भी यादों में ताज़ा है।
जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना
सपा शासनकाल में आज़म खान साहब ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की नींव रखी, जो रामपुर के युवाओं के सपनों का आसमां बन गई। यह संस्थान गरीब मुसलमानों और पिछड़े वर्गों के लिए उच्च शिक्षा का द्वार खोलता है, जहां हजारों छात्र आज भी ज्ञान की ज्योति ग्रहण कर रहे हैं। उनके इस प्रयास ने इलाके को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, मानो अंधेरे में एक उजाला फैल गया हो

रामपुर पब्लिक स्कूलों का सफर
जौहर ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने शहर में चार स्थानों पर रामपुर पब्लिक स्कूल खोले, जहां सरकारी भवनों और ज़मीनों पर गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी गई। ये स्कूल यतीमों और बेसहारा बच्चों के लिए मां-जैसी ममता थे, जिन्होंने अनगिनत जिंदगियों को संवारा। राजनीतिक बदलावों के बावजूद, इनकी यादें आज भी दिल दहला देती हैं।

भावुक विरासत
आज़म साहब की यह सेवा सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि उन मासूम चेहरों की मुस्कान थी, जो शिक्षा से रोशन हुए। जेल की विपत्तियों के बाद भी उनकी यह नेकी अमर रहेगी, रामपुर का हर कोना उनकी कुर्बानी गाता है।

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