Azam Khan ऐ रहमानो रहीम हमें क़ुरआन और सुन्नत वाले रास्ते पर क़ायम रख, और हमें ऐसा मुल्क अता कर जहाँ अद्ल, इंसाफ़, अमन और इज़्ज़त सबको बराबर नसीब हो।
ऐ रहमानो रहीम हमें क़ुरआन और सुन्नत वाले रास्ते पर क़ायम रख,
और हमें ऐसा मुल्क अता कर जहाँ अद्ल, इंसाफ़, अमन और इज़्ज़त सबको बराबर नसीब हो। 
ऐ अल्लाह, हमारे इस मुल्क पर अपना ख़ास फ़ज़्ल व रहमत नाज़िल फ़रमा, इस ज़मीन को अमन, इंसाफ़ और रहमत का घर बना दे। हमारे शहरों, क़स्बों, गलियों और हर उस जगह की हिफ़ाज़त फ़रमा जहाँ लोग डर और बेचैनी में जी रहे हैं।
जो लोग ज़ुल्म की आग में जल रहे हैं, जो बेगुनाह क़त्ल, क़ैद, भूख, बेघर होने और रुसवाई का दर्द उठा रहे हैं, उन सबको अपनी पनाह अता फ़रमा, उनके दिलों को सब्र, उम्मीद और यक़ीन से भर दे, और उनके लिए इज़्ज़त के दरवाज़े खोल दे।
ऐ परवरदिगार, हमारे मुल्क से ज़ुल्म, नाइंसाफी, नफ़रत और ता-अस्सुब को दूर कर दे हमें कमज़ोरों का साथी, मज़लूमों का मददगार और हक़ बोलने वाला बना। जो लोग ज़ुल्म कर रहे हैं लोगों के हक़ छीन रहे हैं, झूठ और ताक़त का ग़लत इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके हाथों से ताक़त छीन ले, उन्हें हिदायत दे, और अगर हिदायत न हो तो उनके शर से इस मुल्क की हिफ़ाज़त फ़रमा।
ऐ रहमानो रहीम हमें क़ुरआन और सुन्नत वाले रास्ते पर क़ायम रख, और हमें ऐसा मुल्क अता कर जहाँ अद्ल, इंसाफ़, अमन और इज़्ज़त सबको बराबर नसीब हो।
ऐ अल्लाह, मज़लूमों की आहें, यतीमों की चीखें और बेबसों की दुआएँ बेअसर न जाने दे उनकी कुर्बानियों के बदले इस मुल्क को बेहतर भविष्य, मज़बूत ईमान और पुरसुकून ज़िंदगी अता फ़रमा। हमें गुनाहों से तौबा की तौफ़ीक़ दे, ज़ालिमों के मुक़ाबले में हिम्मत दे, और अपने हुक्म के सामने सर झुकाने वाला बना। आमीन, या रब्बुल आलमीन।

