Azam Khan का संसद भाषण और शिक्षा पर दृष्टिकोण | भारतीय लोकतंत्र
संसद में अन्याय और भीड़ हिंसा पर Azam Khan की आवाज़, शिक्षा पर उनका दृष्टिकोण और Mohammad Ali Jauhar University का सामाजिक योगदान।

भारतीय लोकतंत्र में एक गूंजती आवाज़
भारतीय लोकतंत्र में समय-समय पर कुछ आवाज़ें ऐसी उठती हैं जो केवल राजनीति नहीं करतीं,
बल्कि समाज के ज़ख्मों को शब्द देती हैं। ऐसे ही एक क्षण में जब संसद में अन्याय और भीड़ हिंसा के मुद्दे पर बहस हो रही थी,
तब Azam Khan की आवाज़ गूंज उठी।
यह आवाज़ केवल एक नेता की नहीं थी, बल्कि उन करोड़ों भारतीय मुसलमानों की भावनाओं की अभिव्यक्ति थी
जिन्होंने इस देश को अपना वतन चुना और इसकी मिट्टी में अपना भविष्य देखा।
उन्होंने विभाजन के दौर को याद करते हुए कहा कि नफरत की आँधियों के बावजूद
असंख्य मुसलमानों ने भारत में रहने का निर्णय लिया।
यह निर्णय किसी दबाव में नहीं, बल्कि इस विश्वास के साथ लिया गया कि यह देश सबका है —
यहाँ की गंगा-जमुनी तहज़ीब, भाईचारा और साझा इतिहास उनकी पहचान है।
भीड़ हिंसा और लोकतंत्र की आत्मा
जब भीड़ हिंसा और अविश्वास की घटनाएँ सामने आती हैं, तो लोकतंत्र की आत्मा आहत होती है।
किसी भी निर्दोष नागरिक के साथ अन्याय — चाहे वह किसी भी धर्म का हो — संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
ऐसे समय में संसद में उठी आवाज़ें केवल राजनीतिक बयान नहीं होतीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का कार्य करती हैं।
शिक्षा: सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम
राजनीतिक बहसों से अलग एक महत्वपूर्ण पहलू है — शिक्षा। यही वह क्षेत्र है जहाँ Azam Khan का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है।
उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थापित Mohammad Ali Jauhar University केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि एक सपना है।
ऐसा सपना जिसमें गरीब और वंचित वर्ग के बच्चे — चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों — उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें।
यह संस्थान इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा ही असली सशक्तिकरण है। यहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई — सभी धर्मों के छात्र अध्ययन करते हैं।
ज्ञान का कोई मज़हब नहीं होता। किताबें किसी से उसका नाम या धर्म नहीं पूछतीं।
समान अवसर और सामाजिक परिवर्तन
गरीब परिवारों के बच्चों के लिए स्कूल, कॉलेज और मेडिकल शिक्षा की सुविधाएँ तैयार करना आसान कार्य नहीं होता।
इसके लिए दूरदृष्टि, संसाधन और संकल्प — तीनों की आवश्यकता होती है।
शिक्षा के माध्यम से:
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समान अवसर पैदा होते हैं
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बेरोज़गारी कम होती है
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सामाजिक दूरी घटती है
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राष्ट्रीय विकास को गति मिलती है
जब एक बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक या वैज्ञानिक बनता है, तो वह केवल अपने परिवार का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र का भविष्य संवारता है।
वर्तमान परिस्थिति और सामाजिक संवेदना
वर्तमान में Abdullah Azam Khan और Azam Khan कानूनी मामलों के कारण जेल में हैं। इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक और कानूनी मत हो सकते हैं,
परंतु लोकतांत्रिक समाज में न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।
देश को आगे ले जाने में योगदान देने वाले व्यक्तियों पर विचार करते समय संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।
निष्कर्ष: भारत की असली ताकत
भारत की ताकत उसकी विविधता और एकता में है। यह वतन सबका है — यहाँ हर धर्म, हर भाषा और हर संस्कृति को सम्मान मिलना चाहिए।
नफरत नहीं, शिक्षा ही वह दीपक है जो अंधेरों को मिटा सकता है।
जब शिक्षा के दीप जलते हैं, तभी राष्ट्र प्रगति करता है।
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