रमज़ान का महीना और इंतज़ार की दुआ: जब इफ्तार की मेज़ पर रिहाई माँगी जाती है
सब्र और दुआ की कहानी — रमज़ान का महीना उन घरों के नाम जहाँ इफ्तार से पहले रिहाई की दुआ की जाती है।

🌙 रमज़ान और इंतज़ार की दुआ: जब इफ्तार की मेज़ पर रिहाई माँगी जाती है
हर साल की तरह रमज़ान आने वाला है। इस साल भी चाँद का इंतज़ार है, दुआओं का मौसम है, रहमत की बारिश है। गलियों में रोशनी सजने लगी है, मस्जिदों में इबादत की तैयारी है, बाज़ारों में रौनक बढ़ रही है। मगर कुछ घर ऐसे भी होते हैं जहाँ रमज़ान की रोशनी पूरी नहीं होती — क्योंकि वहाँ किसी अपने की कमी हर खुशी को अधूरा कर देती है।
रमज़ान का महीना
रमज़ान का महीना सिर्फ रोज़ा रखने का नाम नहीं, बल्कि सब्र, उम्मीद और दुआ का महीना है।
लेकिन जिन घरों का कोई अपना कैद में हो, दूर हो, या मजबूरी में बिछड़ा हो
उनके लिए रमज़ान एक अलग ही इम्तिहान बन जाता है। वहाँ इफ्तार की मेज़ सजती है,
मगर एक जगह खाली रहती है। अज़ान की आवाज़ गूँजती है, मगर दिल भारी हो जाता है।
🕊️ कैद में बैठा बेटा और उसकी रमज़ान की दुआ
एक बेटा जो सलाखों के पीछे है, Abdullah Azam Khan वो आज भी अपने लिए दुआ नहीं करता।
उसका रोज़ा सिर्फ भूख और प्यास का नहीं — बल्कि सब्र और दर्द का रोज़ा होगा।
वो हर रोज़ इफ्तार के वक़्त आसमान की तरफ देखगा है और अपने रब से कहेगा
या अल्लाह…
मेरी अम्मी की आँखों के आँसू क़ुबूल कर ले।
उनकी हर थकान को सुकून में बदल दे।
रमज़ान की दुआ में सबसे पहले उसे अपनी माँ याद आती है। वो माँ जो हर साल उसके लिए इफ्तार तैयार करती थी। उसकी पसंद का खाना बनाती थी। रोज़ा खुलते ही पहले उसे पानी पिलाती थी। आज वही माँ उसके बिना रोज़ा खोलती है। खजूर हाथ में लेकर दुआ करती है — मगर आवाज़ भर्रा जाती है।
🤲 रमज़ान में माँ की दुआ की ताक़त
कहा जाता है कि माँ की दुआ में बहुत असर होता है। रमज़ान के महीने में की गई दुआ तो और भी ज्यादा कबूल होने की उम्मीद रखती है। वो बेटा दुआ करता है:
या रब, मेरी अम्मी की सेहत की हिफाज़त कर।
उनकी रातों की बेचैनी को चैन दे।
उनके दिल को इत्मीनान अता कर।
💪 भाई के हौसले के लिए दुआ
रमज़ान सब्र सिखाता है — और सब्र सबसे ज्यादा उस इंसान को करना पड़ता है जो घर की जिम्मेदारियाँ उठाए खड़ा है। बेटा अपने भाई को याद करता है — जो बाहर से मज़बूत दिखता है मगर अंदर से थका हुआ है। जो लोगों के सवाल, समाज की बातें, और हालात का दबाव झेल रहा है।
वो दुआ करता है:
या अल्लाह, मेरे भाई को हिम्मत दे।
उसे टूटने मत देना।
उसके कदम मज़बूत रख।
👤 बाप का सब्र और खामोश दर्द
घर का सबसे खामोश दर्द अक्सर बाप के हिस्से में आता है। वो कम बोलता है, मगर सबसे ज्यादा सहता है। उसकी पेशानी की लकीरें उसकी फिक्र बयान करती हैं। बेटा अपने बाब्बा के लिए हाथ उठाता है:
या रब, उनके दिल का बोझ हल्का कर दे।
उनकी खामोशी को राहत दे दे।
उनके सब्र को आसान कर दे।
रमज़ान का महीना
रमज़ान का महीना बाप, माँ और परिवार के लिए दुआ करने का सबसे खूबसूरत समय माना जाता है — और यही इस लेख का भावनात्मक केंद्र है।
🌙 कुछ घरों में इफ्तार से पहले रिहाई माँगी जाती है
हर घर में रमज़ान एक जैसा नहीं होता। कुछ घरों में इफ्तार की दुआ में रोज़ी, सेहत और बरकत माँगी जाती है। मगर कुछ घर ऐसे भी होते हैं जहाँ रोटी से पहले रिहाई माँगी जाती है। जहाँ हर शाम दरवाज़े की तरफ देखना एक आदत बन जाती है। जहाँ हर फोन कॉल दिल की धड़कन बढ़ा देता है।
बच्चे पूछते हैं — वो कब आएँगे?
बड़े कहते हैं — इंशाअल्लाह, जल्द।
यही इंतज़ार रमज़ान को उनके लिए और ज्यादा गहरा बना देता है।
📿 रमज़ान: रहमत, माफ़ी और उम्मीद का महीना
रमज़ान हमें सिखाता है कि अँधेरा हमेशा नहीं रहता। मुश्किलें स्थायी नहीं होतीं। दुआ और सब्र मिलकर तक़दीर बदल सकते हैं। यही वजह है कि “रमज़ान का महीना”, “रोज़ा और दुआ”, “रमज़ान रहमत” जैसे विषय हमेशा लोगों के दिल से जुड़े रहते हैं — और सर्च में भी मजबूत प्रदर्शन करते हैं।
जब तरावीह की नमाज़ होती है, जब कुरआन की तिलावत गूँजती है, जब हाथ दुआ के लिए उठते हैं — तब सलाखों के पीछे बैठा इंसान भी अपने रब से उतना ही क़रीब होता है जितना कोई आज़ाद इंसान।
✨ इस रमज़ान की दुआ
इस रमज़ान जब चाँद नज़र आए — तो दुआ सिर्फ अपने लिए नहीं, सबके लिए करें। उन लोगों के लिए भी जो मुश्किल में हैं, जो कैद में हैं, जो इंतज़ार में हैं, जो टूटने के कगार पर हैं।
या रब…
इस बार का चाँद खुशखबरी लेकर आए।
दुआ है हर माँ को सुकून दे।
हर बाप को राहत दे।
भाई को हिम्मत दे।
और हर अधूरे घर को रिहाई की सुबह दिखा। 🤲
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